नागपुर में संविधान चौक को ‘राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल’ बनाने की दिल्ली से गूंजी मांग!

– राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अभय रत्न बौद्ध ने भेजी याचिका
– एकीकृत विकास प्रारूप तैयार कर विशेष निधि उपलब्ध कराने की मांग
– केंद्र और महाराष्ट्र सरकार का भी निवेदन के माध्यम से ध्यान आकर्षित

The Exposer
दिल्ली : महाराष्ट्र के नागपुर शहर मे स्थिती देश के एकमात्र ऐतिहासिक संविधान चौक को ‘राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल’ के रूप में विकसित करने की मांग अब दिल्ली तक पहुंच गई है। बौद्ध संगठनों की राष्ट्रीय समन्वय समिति भारत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र-याचिका भेजकर संविधान चौक के समग्र विकास के लिए एकीकृत विकास प्रारूप तैयार करने तथा इसके क्रियान्वयन हेतु आवश्यक निधि उपलब्ध कराने की मांग की है। इस पहल के माध्यम से संविधान चौक के विकास का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर नागपूर के बाद दिल्ली से उठाया गया है।

राष्ट्रीय बौद्ध धम्म संसद, बुद्धगया एवं बौद्ध संगठनों की राष्ट्रीय समन्वय समिति भारत के राष्ट्रीय समन्वयक एवं संगठक अभय रत्न बौद्ध ने राष्ट्रपति को भेजी गई याचिका में नागरिकों और सामाजिक संगठनों की जनभावनाओं का उल्लेख करते हुए नागपूर शहर मे स्थिती ऐतिहासिक संविधान चौक से लेकरं झिरो मॉईल चौक तक के परिसर का विस्तार कर राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है।

निविदा सूचना के बाद बढ़ी असमंजस की स्थिति

याचिका में उल्लेख किया गया है कि नागपूर शहर स्थिती संविधान चौक के विकास को लेकर स्थानीय सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी प्रशासन तथा महाराष्ट्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाता रहा है। समिति का मानना है कि संविधान चौक जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल के विकास के लिए एक समग्र और दूरदर्शी योजना तैयार की जानी चाहिए, जिससे स्थल का महत्व कायम रखते हुए उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सके।

राष्ट्रपति के साथ केंद्र और राज्य सरकार से भी गुहार

इस मांग को लेकर भेजी गई याचिका की प्रतियां केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा नागपुर के जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद को भी प्रेषित की गई हैं।

समिति की मांग है कि संविधान चौक के विकास के लिए एकीकृत प्रारूप तैयार कर आवश्यक वित्तीय प्रावधान किए जाएं, साथ ही विकास मे बाधा बन रहे केंद्र सरकार और राज्य सरकार की जमीन, और कुछ निजी जमीन को शासन नियमो के अनुसार संपादित करे. ताकि इसे राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित किया जा सके। अब इस मांग पर संबंधित केंद्र और राज्य सरकार के स्तरों से क्या निर्णय लिया जाता है और संविधान चौक के विकास को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर पुरे देशवासियोंकी और सामाजिक संगठनों की नजरें लगी हे।

संतोष तायडे
Author: संतोष तायडे

संपादक

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